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फसल की कटाई के आधुनिक यंत्र

फसल की कटाई के आधुनिक यंत्र

जैसे जैसे किसान की खेती की जोत छोटी होती जा रही है उसी तरह से आजकल नए नए कृषि यन्त्र भी बाजार में आ रहे हैं. अभी रबी की फसल खेतों में शान से लहलहा रही है, किसान अपनी फसल के रंग और आकार को देख कर ही फसल के उत्पादन का अंदाज लगा लेता है. 

अभी किसान की रबी की फसल की कटाई मार्च से शुरू हो जाएगी और जैसा की सभी की फसल की कटाई इसी समय होती है तो जाहिर सी बात है मजदूरों की कमी किसान को होती है. 

कहते हैं न कि "आवश्यकता अविष्कार कि जननी है" तो किसानों कि इसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए हमारे कृषि वैज्ञानिक रात दिन मेहनत कर रहे हैं. 

जब किसान अपने पूरे खेत कि जुताई बुबाई बैलों से नहीं कर पाता था तो ट्रेक्टर आया और जब खेत में फसल की कटाई समय से नहीं हो रही थी तो उसके लिए फसल कटाई के लिए मशीन भी बाजार में आ गई. आज हम इन्हीं मशीनों के बारे में चर्चा करेंगें:

रीपर बाइंडर (Reaper Binder):

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रीपर बाइंडर मशीन इंजन द्वारा चलती है और इसको चलाना भी आसान होता है. इससे किसान कम डीजल खर्चा में ज्यादा काम कर सकता है तथा इससे उसको भूसा भी पूरा मिल जाता है तथा किसान को फसल को इकठ्ठा करने में भी दिक्कत नहीं होती है क्यों की इसको रीपर काटने के साथ साथ उसकी पूरै भी बना देती है. 

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इससे किसानों को मजदूरों की समस्या से कुछ हद तक छुटकारा मिल जाता है. आजकल खेती में कुशल मजदूरों की बहुत ही समस्या है. 

कई बार किसान की पाकी हुई फसल मजदूर न मिलने की वजह से काफी नुकसान होता है. इस नुकसान से बचने के लिए ये छोटी कटाई मशीन बहुत ही काम की मशीन है.

हाथ का रीपर:

हाथ से काटने वाला रीपर भी आता है लेकिन वो फसल के पूरै नहीं बनता है वो एक साइड में कटी हुई फसल को डालता जाता है. बाद में उसे मजदूरों की सहायता से पूरै बना दिया जाता है. 

कंबाइन हार्वेस्टर मशीन: यह मशीन बहुत महँगी होती है तथा ये बड़े किसानों के लिए उपयोगी है. छोटे किसान इसको किराये पर लेकर भी अपनी फसल की कटाई करा सकते हैं. 

इससे कम समय में ज्यादा काम किया जा सकता है. ये फसल को ज्यादा ऊपर से काटती है जिससे बाद में इसके तूरे से भूसा बनाया जा सकता है. 

इसमें किसान अपनी फसल को समय से लाकर बाजार में ले जा सकता है. इसमें कम समय में किसान की फसल भूसे से अलग हो जाती है. कंबाइन हार्वेस्टर मशीन की ज्यादा जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें.

स्ट्रा-रीपर (Straw Reaper) या भूसा बनाने वाली मशीन:

स्ट्रा-रीपर या आप कह सकते हैं की भूसा बनाने वाली मशीन छोटे और बड़े दोनों किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. जो किसान कंबाइन हार्वेस्टर मशीन से खेत को भूसा न बनने की वजह से कटवाने से डरते थे अब वो भी कंबाइन हार्वेस्टर से अपनी फसल कटवाने लगे हैं. 

क्यों की अब स्ट्रा-रीपर से भूसा बनाना आसान हो गया है. चूँकि किसान पशु भी पालते हैं और इसके लिए उन्हें भूसा भी चाहिए. तो भूसा की जरूरत रखने वाले किसानों के लिये तो हाथ से फसल कटवाना मजबूरी भी थी लेकिन जो किसान पशु नहीं पालते हैं,  वो कंबाइन मशीन से फसल कटवाने के इच्छुक भी थे लेकिन वो परेशान भी भी कम नहीं थे. 

क्योंकि कम्बाइन मशीन 30 से 35 सेंटीमीटर ऊपर से ही गेहूं की बालियों को काटती है इसलिए मशीन से कटवाने पर अनाज के नुकसान होने का खतरा रहता है. कम्बाइन मशीन नीचे गिरी हुई बालियों को उठा नहीं पाती है. 

ऐसे में भूसा बनाने वाली मशीन लोगों के लिये वरदान साबित हो रही है. इससे फसल कटवाने पर किसानों कई प्रकार का फायदा होता है. 

पहली बात तो ये कि उन्हें गेहूं के दानों के साथ साथ भूसा भी मिल जाता है. इससे पशुओं के लिये चारे की समस्या खड़ी नहीं होती. 

दूसरा जो दाना मशीन से खेत में रह जाता है उसको ये मशीन उठा लेती है. जिसको की किसान अपने पशु के दाने के रूप में प्रयोग कर लेता है क्योंकि इसमें मिटटी आने की सम्भावना रहती है.

कटर थ्रेसर (Cutter Thresher):

अगर हम कटर थ्रेसर की बात करें तो इसने भी किसानों की जिंदगी बहुत आसान कर दी है. जब किसान हाथ से फसल कटवाते थे तो अनाज को अलग करने के लिए फसल की मिडाई करने के लिए बैल या ट्रेक्टर चला के अनाज को अलग किया जाता था. 

उसके बाद थ्रेसर से करने लगे. 40 क्विंटल अनाज निकालने में 15 घंटे का समय लग जाता था जो की एक बड़े किसान के लिए बहुत ही मेहनत का काम था. 

उसके बाद कटर थ्रेसर आया जो की बहुत ही जल्दी अनाज और भूसा अलग कर देता है. आज के समय में कटर थ्रेसर बहुत ही उपयोगी मशीनरी बनी हुई है। 

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चारा काटने की मशीन:

पशुपालन और खेती दोनों एक दूसरे के पूरक हैं. किसान खेती के साथ साथ पशु पालन भी करता है. खेती से उसके पशुओं का चारा भी आ जाता है और उसके लिए पैसे कमाने का दूसरा जरिया भी बन जाता है. 

पुराने समय में चारा काटने के लिए किसान को बहुत मेहनत करनी पड़ती थी. कम से कम 3  आदमी चारा काटने की मशीन को चलाने के लिए चाहिए होते थे. 

लेकिन अब किसान ने भी इसका समाधान ढूंढ लिया और आज एक ही आदमी 10 - 15 पशुओं का चारा काट देता है वो भी 10 से 15 मिनट में.

चारा काटने की मशीन कैसे काम करती है:

चारा काटने की मशीन को दो आदमी उसके चक्र को हत्था के द्वारा घुमाते हैं तथा एक उसमें चारा डालने का काम करता है. यह बहुत ही मेहनत वाला काम है. इसमें किसान को बहुत समय लगता था और मेहनत भी बहुत होती थी.

इंजन से चलाने वाली मशीन:

इस मशीन को इंजन या बिजली से भी चलाया जा सकता है. इससे सिर्फ एक आदमी की आवश्यकता होती है वही आदमी अकेला ४ आदमी के बराबर काम कर लेता है. 

नीचे दिए वीडियो में देखें अंत में  हम कह सकते हैं की "Technology is a great servant, but a bad master." मशीनीकरण को हम अपने भले के लिए प्रयोग करें तो अच्छा है अन्यथा इसके दुष्परिणाम भी हम को ही झेलने पड़ते हैं.

जैसे की खड़ी फसल को कटवाने के अपने फायदे है तो कुछ नुकसान भी हैं. अगर हम फसल के अवशेष का भूसा बनवा लेते हैं तो ये हमारे लिए लाभदायक है और अगर हम इसके अवशेषों को जलाते हैं तो ये प्रक्रिया हमारी बहुत ही उपजाऊ जमीन को भी बंजर बनाने में बहुत ज्यादा समय नहीं लेती है. 

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फसलों की कटाई और सफाई के लिए उपयोगी 4 कृषि यंत्रों की विशेषताऐं और लाभ

फसलों की कटाई और सफाई के लिए उपयोगी 4 कृषि यंत्रों की विशेषताऐं और लाभ

वर्तमान की बात करें तो किसानों के खेतों में रबी की फसलें लहला रही हैं और जल्द ही इनकी कटाई की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाएगी। ऐसे में किसानों को राहत दिलाने के लिए हम 4 कृषि यंत्रों (4 Farm Machinery ) की जानकारी देने जा रहे हैं। इनका उपयोग करके किसान फसल अवशेषों से भूसा बनाने का कार्य सहजता से कर सकते हैं। इन यंत्रों से किसानों की लागत भी कम आएगी। साथ ही, कटाई का कार्य भी शीघ्रता से हो सकेगा।

फसलों की कटाई के लिए उपयोगी 4 कृषि यंत्र

  • स्ट्रॉ रीपर मशीन 
  • रीपर बाइंडर मशीन 
  • कंबाइन हार्वेस्टर मशीन 
  • मल्टीक्रॉप थ्रेशर मशीन 

स्ट्रॉ रीपर मशीन 

स्ट्रॉ रीपर एक ऐसी कटाई मशीन है, जो एक ही बार में पुआल को काटती है, थ्रेस करती है एवं साफ करती है। स्ट्रॉ रीपर को ट्रैक्टरों के साथ जोडक़र इस्तेमाल किया जाता है। इसके इस्तेमाल से ईंधन की खपत काफी कम होती है। इस यंत्र पर कई राज्य सरकारों की तरफ से सब्सिडी का फायदा भी किसानों को प्रदान किया जाता है।

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विशेषताएं और लाभ

स्ट्रॉ रीपर मशीन की कीमत बहुत ज्यादा नहीं होती है, इसलिए इस कृषि यंत्र को छोटे और बड़े, दोनों किसान सुगमता से इस्तेमाल कर सकते हैं। इस मशीन के उपयोग से फसल काटने पर कई तरह के फायदे किसानों को मिलते हैं, जैसे गेहूं के दानों के साथ-साथ भूसा भी मिल जाता है। यह भूसा पशुओं के चारे के काम में आता है। इसके अतिरिक्त जो दाना मशीन से खेत में रह जाता है, उसको ये मशीन सहजता से उठा लेती है। जिसको किसान अपने पशुओं के लिए दाने के रूप में प्रयोग कर लेते हैं।

रीपर बाइंडर मशीन 

रीपर बाइंडर मशीन का इस्तेमाल फसल की कटाई के लिए किया जाता है। यह मशीन फसल की कटाई करने के साथ – साथ रस्सियों से उनका बंडल भी बनाती है। रीपर बाइंडर की मदद से 5 – 7 से. मी. ऊँची फसल की कटाई आसानी से की जा सकती है। इस यंत्र की सबसे बड़ी खासियत यह है, कि इस मशीन से गेहूं, जौ, धान, जेई और अन्य फसलों की आसानी से कटाई कर बंडल बना सकते है।

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विशेषताएं और लाभ 

रीपर बाइंडर के इस्तेमाल से फसल कटाई का काम आसानी से पूरा किया जा सकता है। इसके इस्तेमाल से धन, समय और मजदूरी सभी की बचत होती है। रीपर बाइंडर मशीन एक घंटे में एक एकड़ जमीन पर खड़ी फसल को काट सकती है। इस मशीन के इस्तेमाल से फसल कटाई के अतिरिक्त उनका बंडल भी निर्मित किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त सबसे बड़ी विशेषता है, कि इसका उपयोग बारिश के मौसम में भी किया जा सकता है। फसल के अतिरिक्त खेतों में उगने वाली झाडियों की भी सहजता से कटाई की जा सकती है। रीपर बाइंडर को एक स्थान से दूसरे स्थान पर लेकर जाना आसान होता है। 

कंबाइन हार्वेस्टर मशीन 

कंबाइन हार्वेस्टर मशीन से एक साथ कटाई तथा सफाई का कार्य किया जा सकता है। इस मशीन की सहायता से सरसों, धान, सोयाबीन, कुसुम आदि की कटाई और सफाई का कार्य कर सकते हैं। इसमें समय और लागत दोनों ही बहुत कम लगती है।

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विशेषताएं और लाभ 

कंबाइन हार्वेस्टर मशीन का प्रयोग कर लागत और समय की बचत की जा सकती है। इससे फसल की कटाई से लेकर फसल के दानों की सफाई तक का काम किया जाता है। इसके उपयोग से मृदा की उर्वरक क्षमता बढ़ती है। इस मशीन के इस्तेमाल से किसान प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली हानि से बच सकते हैं और वक्त रहते फसलों की कटाई कर सकते हैं। कंबाइन हार्वेस्टर मशीन से किसान खेत में आड़ी-तिरछी पड़ी फसल को भी काट सकते हैं।

मल्टीक्रॉप थ्रेशर मशीन 

यह मशीन किसानों के लिए एक बहुत बड़ी उपयोगी मशीन मानी जाती है। मल्टीक्रॉप थ्रेशर मशीन से बाजरा, मक्का, जीरा, डालर चना, सादा चना, देशी चना, ग्वार, ज्वार मूंग, मोठ, ईसबगोल, मसूर, राई, अरहर, मूंगफली, गेहूं, सरसों, सोयाबीन और तुअर जैसी फसलों के दाने साफ-सुथरे तरीके से निकाले जाते हैं। इस मशीन के इस्तेमाल से फसल के दाने और भूसे को भिन्न-भिन्न करने के लिए उपयोग किया जाता है। 

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विशेषताएं और लाभ

मल्टीक्रॉप थ्रेशर मशीन की मुख्य विशेषता है, कि इसके उपयोग से फसल की कटाई कर अनाज और भूसे को अलग किया जाता है। यह मशीन फसलों के दाने को साफ-सुथरे ढ़ंग से अलग करता है। मल्टीक्रॉप थ्रेशर मशीन को एक स्थान से दूसरे स्थान पर आसानी से ले जाया जा सकता है।  खेतों में जहाँ मशीन नहीं पहुँच सकती है, वहाँ हाथ का रीपर मशीन का इस्तेमाल किया जाता है।

महिंद्रा ने 6 आरओ धान ट्रांसप्लांटर को लॉन्च किया, जानिए इससे होने वाले लाभ

महिंद्रा ने 6 आरओ धान ट्रांसप्लांटर को लॉन्च किया, जानिए इससे होने वाले लाभ

जब कभी कृषि से संबंधित किसी उपकरण या ट्रैक्टर का जिक्र होता है, तो सबसे पहले किसानों के मन में महिंद्रा की छवि आती है। ऐसा इसलिए क्योंकि महिंद्रा के सभी उपकरण और कृषि यंत्र वर्षों से अच्छा प्रदर्शन और विश्वसनीयता बनाए हुए हैं। 

विश्व की सबसे बड़ी ट्रैक्टर निर्माता कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड के फार्म इक्विपमेंट सेक्टर (एफईएस) ने महिंद्रा 6आरओ पैडी वॉकर नाम से एक नया 6 पंक्ति वाला धान ट्रांसप्लांटर अनावरित किया है। 

धान की रोपाई में नए मानक स्थापित करते हुए, महिंद्रा की नवीन उन्नत धान रोपाई मशीन उत्कृष्ट ऑपरेटर दक्षता प्रदान करती है और इसे एक ही पास में एक साथ छह पंक्तियों में सटीक और कुशल रोपाई के लिए विकसित किया गया है।

परिचालन क्षेत्र में एक समान प्रत्यारोपण सुनिश्चित करने के लिए, महिंद्रा 6आरओ पैडी वॉकर मैन्युअल रूप से संचालित होता है। डिजाइन में कॉम्पैक्ट है और इसे सीमित जगहों में भी चलाना सुगम है। वर्ना श्रम-केंद्रित प्रक्रिया के मुकाबले में श्रम लागत काफी कम हो जाती है।

नया धान ट्रांसप्लांटर कम खर्चा में ज्यादा उपज दिलाने में मददगार 

नया धान ट्रांसप्लांटर शक्ति, विश्वसनीयता और प्रदर्शन पर ध्यान देने के साथ अत्यधिक टिकाऊ गियरबॉक्स और इंजन का दावा करता है, जो उच्च उत्पादन और कम ईंधन खपत की गारंटी प्रदान करता है। 

धान की खेती में उत्पादकता को ज्यादा से ज्यादा बढ़ाता है। साथ ही, विस्तारित सेवा अंतराल भी देता है। नया समाधान जल संरक्षण को सामर्थ बनाएगा। 

चावल की खेती से जुड़े पर्यावरणीय प्रभाव को कम करेगा। वहीं, फसल की समग्र लाभप्रदता में भी सुधार करेगा। 

नया महिंद्रा 6आरओ पैडी वॉकर तमिलनाडु में महिंद्रा के व्यापक डीलर नेटवर्क के माध्यम से सीमित समय के विशेष ऑफर मूल्य 2, 49 999 रुपये के साथ उपलब्ध होगा। 

नए महिंद्रा 6आरओ पैडी वॉकर को महिंद्रा फाइनेंस और श्रीराम फाइनेंस से सर्वोत्तम श्रेणी के वित्तपोषण विकल्पों के साथ भी प्रस्तुत किया जाएगा।

महिंद्रा कृषि प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी स्थान पर बना हुआ है। साथ ही, विश्व भर के किसानों को ज्यादा सफलता और स्थिरता हांसिल करने में सहयोग कर रहा है। 

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महिंद्रा पैडी वॉकर 6आरओ का अनावरण नवीन अत्याधुनिक कृषि प्रौद्योगिकी समाधानों के जरिए से खेती में परिवर्तन और किसानों के जीवन को समृद्ध और सशक्त बनाने के लिए कंपनी के समर्पण को रेखांकित करता है।

महिंद्रा पैडी वॉकर 6आरओ की प्रमुख विशेषताएं क्या-क्या हैं ?

इससे उच्च सटीकता और सटीक रोपण में मदद मिलती है। 

  • स्थिर अंकुर प्रत्यारोपण तंत्र: समायोज्य रोपण अंतर के साथ, तैरते हुए अंकुरों और गलत रोपण को रोकता है। 
  • स्थिर बीजारोपण फीड: उचित अंकुरण पोषण के लिए रबर स्पाइक्स की सुविधा। 
  • क्षैतिज नियंत्रण: असमान खेत की सतहों पर भी स्थिर रोपण गहराई बनाए रखता है।

सुविधाजनक एवं कुशल धान रोपाई इस प्रकार करता है

  • बड़े व्यास वाला पहिया: क्षेत्र संचालन और गतिशीलता के लिए अनुकूलन क्षमता को बढ़ाता है।
  • समायोजन: फसल की विविधता और रोपण के मौसम के आधार पर अंकुर फीड और रोपण की गहराई के आसान समायोजन की अनुमति देता है।
  • हल्का वजन: क्षेत्र में कॉम्पैक्ट और सुचारू रूप से काम करने में सक्षम बनाता है।

कम खर्चा में ज्यादा कमाई

अत्यधिक टिकाऊ गियरबॉक्स: गुणवत्ता और विश्वसनीयता के प्रति प्रतिबद्धता के साथ, नया महिंद्रा पैडी वॉकर 6आरओ एक उच्च गुणवत्ता और टिकाऊ गियरबॉक्स का उपयोग करता है जो लंबे समय तक चलने वाले प्रदर्शन के लिए जलरोधक है।

उच्च आउटपुट ओएचवी पेट्रोल विश्वसनीय इंजन: हल्का, कॉम्पैक्ट, कम शोर, कंपन और ईंधन-कुशल के साथ, नया महिंद्रा पैडी वॉकर 6आरओ लंबे समय तक चलने के लिए विकसित किया गया है।

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बड़ा ईंधन टैंक: कुशल और निरंतर काम के लिए नया धान ट्रांसप्लांटर चार लीटर की बड़ी क्षमता वाले ईंधन टैंक से सुसज्जित है।

व्यापक बिक्री के पश्चात सेवा के साथ मन की शांति।

महिंद्रा सेवा: अनुभवी महिंद्रा सेवा कर्मियों द्वारा महिंद्रा डीलरों पर गुणवत्तापूर्ण सेवाएं।

असली हिस्से: असली महिंद्रा हिस्से महिंद्रा डीलरशिप पर उपलब्ध हैं।

जानें किसानों को बिजाई में मदद करने वाले 5 कृषि उपकरणों के बारे में

जानें किसानों को बिजाई में मदद करने वाले 5 कृषि उपकरणों के बारे में

कृषक भाई भारत के अंदर बुवाई के लिए विभिन्न फर्टिलाइजर मशीनों का इस्तेमाल करते हैं। इन उपकरणों के साथ किसान कम वक्त में खेतों में बिजाई का कार्य पूर्ण कर पाते हैं। कृषि उपकरणों की सहायता से किसान खेती में वक्त और मजदूरी की बचत कर सकते हैं। कृषि करने के लिए कृषकों को कई तरह के कृषि उपकरणों और यंत्रों की जरूरत पड़ती है। खेती-किसानी में हर एक कृषि यंत्र का भिन्न-भिन्न कार्यों में इस्तेमाल किया जाता है। भारत में बिजाई के लिए किसान बहुत सारे फर्टिलाइजर मशीनों का इस्तेमाल करते हैं। इन उपकरणों के इस्तेमाल से कृषक कम वक्त में खेतों में बुवाई का कार्य निपटा लेते हैं। 

बिजाई में मदद करने वाले 5 कृषि उपकरण

न्यूमेटिक मल्टी क्रॉप प्लांटर

Pneumatic Multi Crop Planter का उपयोग केवल बीज को पूर्व-निर्धारित बीज से बीज की दूरी एवं पंक्तियों की दूरी में बीजाई करने के लिए किया जाता है। बतादें, यह कृषि यंत्र ट्रैक्टर द्वारा संचालित है और इसमें सेंट्रीफ्यूगल ब्लोअर लगा हुआ होता है। इसका इस्तेमाल वायुदाब ग्रहण करके मीटरिंग मेकेनिज्म में बीज रोपण के लिए किया जाता है। इस उपकरण के अंदर आपको मेन फ्रेम, एस्पिरेटर ब्लोअर, सैल टाइप मीटरिंग प्लेट वाली डिस्क, अलग अलग हॉपर, फरो ओपनर, पी.टी.ओ. द्वारा चालित शाफ्ट, ग्राउंड ड्राइव व्हील इत्यादि लगे होते हैं। यह सोयाबीन, कपास, मटर, मक्का, मूँगफली, भिंडी, सरसों और ज्वार आदि के बीज के रोपण हेतु उपयुक्त है। भारत में Pneumatic Multi Crop Planter की कीमत लगभग 50 हजार रुपये हो सकती है।

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सीड एंड फर्टिलाइजर ड्रिल

Seed And Fertilizer Drill का उपयोग खेती के लिए पहले से तैयार क्षेत्र में गेहूं और अन्य अनाज की फसलों की बीजाई के लिए किया जाता है। इस यंत्र में एक सीड बॉक्स, फर्टिलाइजर बॉक्स, सीड व फर्टिलाईजर मिटरिंग मेकनिज्म, सीड ट्यूब, फरो ओपनर तथा सीड एवं फर्टिलाईजर रेट एडजस्टिंग लीवर और ट्रांसपोर्ट सब पावर ट्रांसमीटिंग व्हील लगे होते हैं। फ्लूटेड रोलर सीड बॉक्स मे लगे होते हैं, जो नली मे बीज प्राप्त करते है और फरो ओपनर से जुड़ी सीड ट्यूब मे डालते है। रोलर को खिसकाने पर बीज प्राप्त करने वाली नली की लंबाई बढ़ाई या घटाई जा सकती है। इससे बुवाई के समय बीज की मात्रा कम या ज्यादा हो सकती है। भारत में सीड एंड फर्टिलाइजर ड्रिल की कीमत करीब 35 हजार रुपये हो सकती है। 

जीरो टिल ड्रिल

Zero Till Drill एक कृषि उपकरण है, जिसका इस्तेमाल ट्रैक्टर के माध्यम से किया जाता है। जीरो टिल ड्रिल का उपयोग धान कटाई के उपरांत खेत को बिना जुताई किए गेहूं की बीजाई के लिए किया जाता है। इस यंत्र में फ्रेम, सीड बॉक्स, फर्टिलाइजर बॉक्स, सीड व फर्टिलाईजर मिटरिंग मेकनिज़्म, सीड ट्यूब, फरो ओपनर तथा सीड एवं फर्टिलाईजर रेट एडजस्टिंग लीवर और ट्रांसपोर्ट तथा पावर ट्रांसमीटिंग व्हील लगे होते हैं। यह कृषि उपकरण समुचित गहराई और उचित दूरी पर बीजों की बिजाई कर सकती है। भारत में जीरो टिल ड्रिल की कीमत करीब 35 हजार रुपये हो सकती है। 

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स्ट्रिप टिल ड्रिल

Strip Till Drill का इस्तेमाल धान की कटाई के बाद बिना भूमि तैयार किए गेहूं की बिजाई के लिए किया जाता है। इस यंत्र से पारंपरिक पद्धति के मुकाबले 50 से 60 प्रतिशत ईंधन और 65 से 75 प्रतिशत समय की बचत की जा सकती है। इस यंत्र की सहायता से फसल की बुवाई समय पर करने से और भी ज्यादा उत्पादन हांसिल किया जा सकता है। इसके रोटरी सिस्टम में C टाइप ब्लेड लगे होते हैं, जो खेत में प्रत्येक फरो ओपनर के आगे 75 MM चौड़ी पट्टी कि जुताई कर सकते है। भारत में स्ट्रिप टिल ड्रिल की कीमत तकरीबन 50 हजार रुपये हो सकती है।

फर्टिलाइजर ब्रॉडकास्टर

Fertilizer Broadcaster का उपयोग फसल में दानेदार खाद और बीज के छिड़काव के लिए किया जाता है। यह कृषि यंत्र आपको हस्तचालित और ट्रैक्टर चालित दोने रूप में देखने को मिल जाता है। फर्टिलाइजर ब्रॉडकास्टर को ट्रैक्टर के पीछे लगा कर संचालित किया जाता है। यह इसकी पीटीओ पावर से चलता है। इस यंत्र पर एक हॉपर और एक घूमने वाली डिस्क लगी होती है। हापर में से बीज या खाद को तेजी से घूमने वाली डिस्क पर गिरने दिया जाता है। इसमें बीज/खाद की मात्रा स्पीनिंग डिस्क तक पहुंचने वाली गति शटर प्लेट द्वारा नियंत्रित की जा सकती है। भारत में फर्टिलाइजर ब्रॉडकास्टर की कीमत करीब 12 हजार हो सकती है। 

स्वराज 735 एफई ट्रैक्टर की विशेषताएँ, फीचर्स और कीमत क्या है ?

स्वराज 735 एफई ट्रैक्टर की विशेषताएँ, फीचर्स और कीमत क्या है ?

ट्रैक्टर को किसान का मित्र कहा जाता है। यदि आप कृषि कार्यों के लिए सस्ता एवं मजबूत ट्रैक्टर खरीदने का विचार बना रहे हैं। ऐसे में आपके लिए स्वराज 735 एफई ट्रैक्टर शानदार विकल्प हो सकता है। इस ट्रैक्टर को कंपनी ने कृषकों की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया है। इस ट्रैक्टर में 1800 आरपीएम के साथ 40 HP पावर उत्पन्न करने वाला 2734 CC इंजन आता है। कृषि क्षेत्र में किसानों की मदद में ट्रैक्टर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। किसान ट्रैक्टर के सहयोग से खेती के बहुत से बड़े कार्यों को पूर्ण कर सकता है। खेतीबाड़ी के लिए सस्ता और मजबूत का बेजोड़ संगम स्वराज 735 एफई ट्रैक्टर एक शानदार विकल्प हो सकता है।

स्वराज 735 एफई ट्रैक्टर की क्या-क्या विशेषताऐं हैं ?

Swaraj 735 FE ट्रैक्टर में आपको 2734 सीसी क्षमता वाला 3 सिलेंडर में Water Cooled इंजन देखने को मिल जाता है, जो 40 HP पावर जनरेट करता है. इस ट्रैक्टर में 3- Stage Oil Bath Type एयर फिल्टर दिया गया है. इस स्वराज ट्रैक्टर की मैक्स पीटीओ पावर 32.6 HP है. इस ट्रैक्टर के इंजन से 1800 आरपीएम उत्पन्न होता है. स्वराज 735 एफई की वजन उठाने की क्षमता 1000 किलोग्राम रखी गई है. कंपनी का यह ट्रैक्टर 1845 किलोग्राम कुल वजन के साथ आता है. स्वराज कंपनी ने अपने इस ट्रैक्टर को 1930 MM व्हीलबेस में निर्मित किया है. इस ट्रैक्टर में आपको 48 लीटर क्षमता वाला फ्यूल टैंक देखने को मिल जाता है.

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स्वराज 735 एफई के क्या-क्या फीचर्स होते हैं ?

स्वराज के इस ट्रैक्टर्स में आपको Mechanical/Power (optional) टाइप स्टीयरिंग प्रदान की जाती है। Swaraj 735 FE ट्रैक्टर में 8 Forward + 2 Reverse गियर वाला गियरबॉक्स आता है। कंपनी के इस ट्रैक्टर में Dual क्लच प्रदान किया गया है और यह ट्रैक्टर Single Dry Disc Friction Plate टाइप ट्रांसमिशन के साथ आता है। स्वराज कंपनी ने अपने इस ट्रैक्टर की 27.80 kmph फॉरवर्ड स्पीड और 10.74 kmph रिवर्स स्पीड रखी है। इस स्वराज ट्रैक्टर में आपको Oil immersed / Dry Disc ब्रेक्स प्रदान किए जाते हैं। कंपनी के इस ट्रैक्टर में Multi Speed PTO टाइप पावर टेकऑफ आती है, जो 540/1000 आरपीएम उत्पन्न करती है। Swaraj 735 FE ट्रैक्टर 2WD ड्राइव में आता है, इसमें आपको 6.00 x 16 फ्रंट टायर और 12.4 x 28 / 13.6 x 28 रियर टायर देखने को मिल जाते हैं।

स्वराज 735 एफई की कितनी कीमत है ?

भारत में स्वराज 735 एफई ट्रैक्टर की एक्स शोरूम कीमत 5.85 लाख से 6.20 लाख रुपये निर्धारित की गई है। Swaraj 735 FE ट्रैक्टर का ऑन रोड प्राइस समस्त राज्यों में आरटीओ रजिस्ट्रेशन और रोड टैक्स के चलते भिन्न हो सकता है। स्वराज कंपनी अपने इस Swaraj 735 FE  ट्रैक्टर के साथ 2 साल की वारंटी प्रदान करती है।

इस राज्य में ट्रैक्टर खरीदने पर सरकार की तरफ से 1 लाख का अनुदान

इस राज्य में ट्रैक्टर खरीदने पर सरकार की तरफ से 1 लाख का अनुदान

कृषि कार्यों में किसानों का सबसे सच्चे साथी ट्रैक्टर कृषकों की आर्थिक स्थिति को सुधारने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 

खेती में सबसे ज्यादा उपयोग किए जाने वाले यंत्र मतलब कि ट्रैक्टर की खरीद पर कृषकों को मोटा अनुदान प्रदान किया जा रहा है। योजना का लाभ हांसिल करने के लिए किसान भाई शीघ्रता से आवेदन करें। 

आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि हरियाणा सरकार द्वारा ट्रैक्टर की खरीद पर यह अनुदान मुहैय्या कराया जा रहा है। हालांकि, सभी किसान अनुदान का फायदा नहीं उठा पाऐंगे। 

ये केवल अनुसूचित जाति के किसानों के लिए है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा अनुसूचित जाति के कृषकों को 45 एचपी व उससे ज्यादा क्षमता वाले ट्रैक्टर पर 1 लाख का अनुदान मुहैय्या कराया जा रहा है। 

इसके लिए किसान 26 फरवरी से 11 मार्च तक विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। 

जानिए किस प्रकार किया जाएगा चयन

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि हर एक जिले में लाभार्थी का चयन गठित जिला स्तरीय कार्यकारी समिति द्वारा ऑनलाइन ड्रॉ के जरिए किया जाएगा। 

चयन के उपरांत चयनित किसान को सूचीबद्ध अनुमोदित निर्माताओं से अपनी प्राथमिकता आधारित ट्रैक्टर मॉडल और मूल्य का चुनाव करके सिर्फ बैंक के जरिए से अपने भाग की कीमत अनुमोदित खाते में जमा करवानी होगी। 

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डिस्ट्रीब्यूटर से किसान के विवरण, बैंक का विवरण, ट्रैक्टर मॉडल, मूल्य की मान्यता के पोर्टल या ई-मेल के जरिए अनुदान ई-वाउचर के लिए प्रार्थना करनी होगी।

पीएमयू और बैंक की जांच के पश्चात डिजिटल ई-वाउचर से मान्यता प्राप्त डिस्ट्रीब्यूटर को जारी किया जाएगा। अनुदान ई-वाउचर प्राप्त होने के शीघ्रोपरान्त किसान को उसकी चुनी हुई ट्रैक्टर के साथ बिल, बीमा, टेम्परेरी नंबर तथा आरसी के आवेदन शुल्क की रसीद इत्यादि दस्तावेजों को विभागीय पोर्टल पर अपलोड करने होंगे। 

दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन करना बेहद आवश्यक

जिलास्तरीय कार्यकारी समिति को ट्रैक्टर के समस्त जरूरी दस्तावेजों समेत भौतिक सत्यापन प्रस्तुत करना होगा। समिति सभी दस्तावेजों की जांच करने के बाद भौतिक सत्यापन रिपोर्ट फॉर्म के साथ पोर्टल पर अपलोड करेगी और निदेशालय को ईमेल के माध्यम से सूचित करेगी। निदेशालय स्तर पर जांच के पश्चात अनुदान स्वीकृति ई-वाउचर के जरिए से किसान को जारी करेगा।

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किसान भाई ज्यादा जानकारी हेतु यहां संपर्क करें 

किसान भाई ज्यादा जानकारी के लिए जिला कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक एवं सहायक कृषि अभियंता के कार्यालय से संपर्क साध सकते है। 

साथ ही, इच्छुक किसान कृषि विभाग की वेबसाइट www.agriharyana.gov.in पर जाकर विजिट करें। इसके अतिरिक्त टोल फ्री नंबर 1800-180-2117 पर भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के ट्वीट में छिपी है यह तारांकित खुशखबरी

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के ट्वीट में छिपी है यह तारांकित खुशखबरी

ट्रैक्टर से जुड़ी है गुड न्यूज़, जानिये कब मिलेगी सौगात

भारत की केंद्रीय सरकार में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने अधिकृत ट्विटर हैंडल से कृषक हितैषी तारांकित खुशखबरी दी है। यूनियन एग्रीकल्चर मिनिस्टर (Union Agriculture Minister)
नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) ने जुलाई मासांत, दिवस 31 जुलाई 2022 को दोपहर 1.24 बजे ट्वीट के जरिए किसान और किसानी के हित से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी जारी की। केंद्रीय कृषि मंत्री तोमर ने अपने ट्वीट (Tweet) में मध्य प्रदेश के केंद्रीय कृषि मशीनरी प्रशिक्षण और परीक्षण संस्थान बुदनी (Central Farm Machinery Training & Testing Institute, Budni, Madhya Pradesh, INDIA/सीएफएमटीटीआई/CFMTTI), द्वारा लिए गए निर्णय के बारे में जानकारी दी। उन्होंने #आजादीकाअमृतमहोत्सव (#AzadiKaAmritMahotsav) एवं #आत्मनिर्भरकृषि (#AatmaNirbharKrishi) हैश टैग के साथ ट्रैक्टर से जुड़े बड़े फैसले के बारे में जानकारी दी।
आत्मनिर्भर कृषि ऐप्प (Atmanirbhar Krishi app) से सम्बंधित सरकारी प्रेस रिलीज़ दस्तावेज पढ़ने या पीडीऍफ़ डाउनलोड के लिए, यहां क्लिक करें
उन्होंने ट्वीट में सीएफएमटीटीआई बुदनी द्वारा खेती कार्य में प्रयुक्त होने वाले ट्रैक्टर्स की टेस्टिंग प्रोसेस यानी परीक्षण प्रक्रिया के लिए पूर्व में निर्धारित समय सीमा 9 माह को घटाकर 75 दिन करने के बारे में सूचना प्रदान की। अपने ट्वीट में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने एक पोस्टर शेयर किया है। इस पोस्टर में किसान, ट्रैक्टर के साथ स्वयं केंद्रीय मंत्री तोमर भी दृष्टव्य हैं। गौर करने वाली बात यह है कि यूनियन मिनिस्टर ऑफ स्टेट फॉर एग्रीकल्चर एंड फार्मर वेलफेयर नरेंद्र सिंह तोमर द्वारा साझा किए गए पोस्टर में तारांकित सूचना पर आपको जरा बारीकी से नजर डालनी होगी। दरअसल पोस्टर में ट्रैक्टर परीक्षण प्रक्रिया डेडलाइन कम करने, आजादी के अमृत महोत्सव आदि सभी को तो बड़े अक्षरों में प्रदर्शित किया गया है, लेकिन इस बात का खुलासा तारांकित चिह्न के साथ अपेक्षाकृत महीन अक्षरों में जाहिर किया गया है कि, प्रक्रियागत यह बदलाव कब से लागू होगा। इमेज को जूम कर गौर से पढ़ने पर पता चलता है कि, ट्रैक्टर परीक्षण प्रक्रिया 9 माह से घटाकर 75 दिन करने संबंधी प्रोसेस इस महीने 15 अगस्त से लागू होगी।


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इस लिंक में आप भी पढ़िये केंद्रीय मंत्री तोमर का ट्वीट एवं देखिए ट्वीट में साझा किए गए पोस्टर को। सौजन्य- ट्विटर: https://twitter.com/nstomar/status/1553650290603110400

ट्वीट पर प्रतिक्रिया

जैसा कि ट्विटर पर क्रिया की प्रतिक्रिया की प्रक्रिया की रवायत है, तो आपको बता दें इस सिलसिले में 31 जुलाई 2022 को दोपहर 1.24 बजे केंद्रीय मंत्री के सोशल मीडिया अकाउंट से जारी इस ट्वीट पर तीन शाब्दिक प्रतिक्रियाएं ही दर्ज हुईं, जिसमें से दो बधाई संबंधी हैं, तो एक में शिकायती भाव में किसान का दुखड़ा दर्ज है। हिसार, हरियाणा के एक यूजर ने रिप्लाई में बीमा योजना का लाभ अपात्रों को प्रदान करने एवं पात्र हितग्राहियों के वंचित रहने की परेशानी का जिक्र किया है, आप भी पढ़िये। सौजन्य- ट्विटर : https://twitter.com/yaarabmole/status/1553677560214863872?t=1ZUT0NhVtICm6cKYpKZTLw&s=19 वैसे ट्रैक्टर परीक्षण प्रक्रिया में लगने वाले समय को कम करने से क्या लाभ और परिणाम होंगे, इस बारे में आप अपने विचार हमारे साथ साझा करें।
रोटरी हार्वेस्टर मशीन पर 80 प्रतिशत सब्सिडी दे रही है ये राज्य सरकार, यहां करें आवेदन

रोटरी हार्वेस्टर मशीन पर 80 प्रतिशत सब्सिडी दे रही है ये राज्य सरकार, यहां करें आवेदन

रबी का सीजन प्रारंभ हो चुका है। ऐसे में खेतों की जुताई की जा रही है ताकि खेतों को बुवाई के लिए तैयार किया जा सके। बहुत सारे खेतों में अब भी पराली की समस्या बनी हुई है, जिसके कारण खेतों को पुनः तैयार करने में परेशानी आ रही है। खेतों से फसल अवशेषों को निपटाना बड़ा ही चुनौतीपूर्ण काम है, इसमें बहुत ज्यादा समय की बर्बादी होती है। अगर किसान एक बार पराली का प्रबंधन कर भी ले, तो इसके बाद भी खेत से बची-कुची ठूंठ को निकालने में भी किसान को कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। लेकिन यदि आज की आधुनिक खेती की बात करें तो बाजार में ऐसी कई मशीनें मौजूद है जो इस समस्या का समाधान चुटकियों में कर देंगी। इन मशीनों के प्रयोग से अवशेष प्रबंधन के साथ-साथ खेतों की उर्वरा शक्ति में भी बढ़ोत्तरी होगी। ऐसी ही एक मशीन आजकल बाजार में आ रही है जिसे रोटरी हार्वेस्टर मशीन कहा जाता है। यह मशीन फसल के अवशेषों को नष्ट करके खेत में ही फैला देती है। यह मशीन किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है। इस मशीन के फायदों को देखते हुए बिहार सरकार ने मशीन की खरीद पर किसानों को 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी देने के लिए कहा है।

क्या है रोटरी हार्वेस्टर मशीन

इस मशीन को रोटरी मल्चर भी कहा जाता है, यह मशीन बेहद आसानी से खेत में बचे हुए अनावश्यक अवशेषों को नष्ट करके खेत में फैला देती है, जिसके कारण खेत में पर्याप्त नमी बरकरार रहती है। इसके साथ ही खेत में फैले हुए अवशेष डीकंपोज होकर खाद में तब्दील हो जाते हैं। अवशेषों के प्रबंधन की बात करें तो यह मशीन खेत में उम्दा प्रदर्शन करती है।

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रोटरी हार्वेस्टर मशीन पर बिहार सरकार कितनी देती है सब्सिडी

अगर रोटरी हार्वेस्टर मशीन की बात करें तो उस मशीन पर बिहार सरकार किसानों को 75 से 80 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान करती है। यह सब्सिडी बिहार का कृषि विभाग 'कृषि यंत्रीकरण योजना' के अंतर्गत किसानों को उपलब्ध करवाता है। बिहार सरकार के द्वारा जारी आदेश के अनुसार यदि बिहार का सामन्य वर्ग का किसान रोटरी हार्वेस्टर मशीन लेने के लिए आवेदन करता है, तो उसे बिहार सरकार मशीन की खरीद पर 75 प्रतिशत तक की सब्सिडी या अधिकतम 1,10,000 रुपये प्रदान करेगी। इसके साथ ही यदि बिहार का एससी-एसटी, ओबीसी और अन्य वर्ग का किसान रोटरी हार्वेस्टर मशीन खरीदना चाहता है, तो आवेदन करने के बाद सरकार उसे रोटरी मल्चर पर 80 प्रतिशत तक सब्सिडी और रूपये में अधिकतम 1,20,000 रुपये की सब्सिडी प्रदान करेगी।

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रोटरी हार्वेस्टर मशीन पर सब्सिडी प्राप्त करने के लिए ऐसे करें आवेदन

बिहार सरकार के आदेश के अनुसार रोटरी हार्वेस्टर मशीन पर सब्सिडी प्राप्त करने के लिए किसान को बिहार का निवासी होना जरूरी है। साथ ही उसके पास कृषि योग्य भूमि भी होनी चाहिए। ऐसे किसान जो रोटरी हार्वेस्टर मशीन पर सब्सिडी प्राप्त चाहते हैं, वो बिहार कृषि विभाग के पोर्टल https://dbtagriculture.bihar.gov.in/ पर जाकर अपना ऑनलाइन आवेदन भर सकते हैं। किसानों को ऑनलाइन आवेदन भरते समय आधार कार्ड, पैन कार्ड, जमीन के कागजात, पासपोर्ट साइज फोटो, बैंक खाता संख्या और मोबाइल नंबर अपने साथ रखना चाहिए। इनकी डीटेल आवेदन भरते समय किसान से मांगी जाएगी। इसके अलावा यदि किसान कृषि यंत्रों से संबंधित किसी भी प्रकार की अन्य जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो वो कृषि विभाग के हेल्पलाइन नंबर 18003456214 पर भी संपर्क कर सकते हैं।

KITS वारंगल ने विकसित किया स्वचालित ट्रैक्टर, लागत और मेहनत करेगा कम

KITS वारंगल ने विकसित किया स्वचालित ट्रैक्टर, लागत और मेहनत करेगा कम

आज के आधुनिक और मशीनीकरण युग में नित नए अविष्कार हो रहे हैं। सभी क्षेत्रों में अच्छे खासे बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इसी कड़ी में KITS वारंगल द्वारा स्वचालित ट्रेक्टर विकसित किया है, जिसका फिलहाल चौथा ट्राइल भी सफलता पूर्वक तरीके से संपन्न हो गया है। बतादें, कि यह ट्रेक्टर लागत प्रभावी है, जो आधुनिक तरीके से किसानों की आमदनी को बढ़ाएगा। आधुनिक तकनीकों एवं मशीनों द्वारा तकरीबन हर क्षेत्र में क्रांति का उद्घोष हो चुका है। महीनों तक विलंबित पड़े कार्य फिलहाल चंद मिनटों में पूर्ण हो जाते हैं। खेती-किसानी के कार्यों को भी सुगम एवं सुविधाजनक करने हेतु बहुत सारे यंत्र, टूल्स एवं वाहन तैयार किए जा रहे हैं। जो कि लागत को प्रभावी होने के साथ-साथ किसानों की आमदनी को दोगुना करने में सहायक हैं। इसी ओर काकतीय इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस, वारंगल (KITS-W) ने किसानों के लिए एक ड्राइवरलैस ऑटोमैटिक ट्रैक्टर तैयार किया है, जिसका चौथा ट्राइल भी सफलतापूर्ण ढंग से संपन्न हो चुका है।

इस स्वचालित ट्रैक्टर की क्या-क्या विशेषताएं हैं

KITS, वारंगल के कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग (CSE) के प्रोफेसर डॉ. पी निरंजन ने बताया है, कि ड्राइवरलैस स्वचालित ट्रैक्टर के लिए 41 लाख रुपये की परियोजना राशि मुहैय्या कराई गई थी। इसी कड़ी में इस ट्रेक्टर की विशेषताओं को लेकर इस प्रोजेक्ट के हैड अन्वेषक एमडी शरफुद्दीन वसीम ने जानकारी दी है, कि यह स्वचालित ट्रैक्टर किसानों को सुविधाजनक तरीके से खेतों की जुताई करने में सहायता करेगा। उन्होंने कहा है, कि यह लागत प्रभावी ट्रेक्टर खेती में किसानों की लागत के साथ-साथ समय की भी बचत होगी। साथ ही, किसानों की आमदनी को अधिक करने में भी सहायक भूमिका निभाएगी। ये भी पढ़े: भारत में लॉन्च हुए ये 7 दमदार नए ट्रैक्टर विशेषज्ञों के कहने के मुताबिक, इस स्वचालित ट्रैक्टर को विकसित करने का प्रमुख लक्ष्य खेती में मानव परिश्रम को कम करना है। इस ट्रैक्टर को बिल्कुल उसी प्रकार डिजाइन किया गया है। किसान भाई एक रिमोट द्वारा नियंत्रित उपकरण से इस ट्रैक्टर का सफल संचालन कर कृषि कार्य कर सकते हैं।

इस तरह संचालित होगा यह ट्रैक्टर

सीएसई के प्रोफेसर निरंजन रेड्डी का कहना है, कि स्वचालित ऑटोमैटिक ट्रेक्टर को कंप्यूटर गेम की भांति ही एक एंड्रॉइड एप्लीकेशन की सहायता से संचालित कर सकते हैं। इस स्वचलित ट्रेक्टर में लाइफ फील्ड से डेटा एकत्रित करने हेतु विशेषज्ञों ने सेंसर भी स्थापित किए हैं, जो कि किसी जगह विशेष पर कार्य करने हेतु तापमान एवं मृदा की नमी का भी पता करने में सहायता करेंगे। इससे मृदा की खामियों के विषय में भी जाँच करके डेटा एकत्रित करने में भी सुगमता रहेगी।
किसान भाई इन दो कृषि उपकरणों से कुछ ही घंटे में गेंहू की फसल काट सकते हैं

किसान भाई इन दो कृषि उपकरणों से कुछ ही घंटे में गेंहू की फसल काट सकते हैं

रबी की फसलों के अंतर्गत गेहूं खाद्यान्न की प्रमुख फसल के तौर पर किसानों द्वारा चुनी जाने वाली प्रमुख फसल है। हम आज आपको इस फसल की कटाई से संबंधित दो कृषि यंत्रों के बारे में जानकारी प्रदान करने जा रहे हैं, जिनके माध्यम से आप कई एकड़ फसल को कुछ ही घंटों के अंदर काट सकते हैं। किसान और सरकार चाहते हैं, कि भारतभर में फसलों का उत्पादन और उनकी गुणवत्ता में बढ़ोत्तरी हो। क्योंकि, इससे कृषक एवं सरकार दोनों को फायदा होगा। लेकिन यह सिर्फ तब ही संभव हो पाएगा, जब फसल उत्पादन का काम कम लागत में संपन्न हो। इसका एक मात्र विकल्प यह है, कि आधुनिक कृषि यंत्रों का इस्तेमाल किया जाए, जिससे कि समय, श्रम एवं लागत की बचत हो पाए। इससे किसानों को अच्छा मुनाफा भी हांसिल हो सकेगा। ऐसे में आज हम ऐसे आधुनिक 2 कृषि यंत्रों के विषय में बताएंगे, जो कि गेहूं की कटाई को काफी सुगम बना देते हैं।

ट्रैक्टर चलित रीपर बाइंडर

आपकी जानकरी के लिए बतादें, कि इस मशीन के द्वारा कटर बार से पौधे कटे जाते हैं, उसके बाद पुलों में बंध जाते हैं। इसके पश्चात संचरण प्रणाली द्वारा एक ओर गिरा दिया जाता है। मुख्य बात यह है, कि इस मशीन की सहायता से कटाई और बंधाई का काम बेहद ही सफाई से होता है।

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कार्यक्षमता: इससे तकरीबन 0.40 हेक्टेयर/घंटा की दर से कटाई कर सकते हैं। इससे कटाई की लागत लगभग 1050/- रुपए घंटा आती है। कीमत: इस मशीन का अनुमानित मूल्य तकरीबन 2 से 3 लाख रुपए के आस-पास होता है।

स्वचालित वर्टिकल कन्वेयर रीपर

किसान भाइयों आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि छोटे और मध्यम किसानों के लिए गेहूं की कटाई करने हेतु यह अत्यंत उपयोगी मशीन है। इस मशीन में आगे की तरफ एक कट्टर बार लगी होती है, तो वहीं पीछे संचरण प्रणाली लगी होती है। इसके साथ ही रीपर में तकरीबन 5 हॉर्स पावर का एक डीजल इंजन लगा होता है, जो कि पहियों और कटर बार के लिए चलाने का कार्य करता है। कीमत: इस मशीन की अनुमानित लागत रुपए लगभग 100000/- है। कार्यक्षमता: इस मशीन से कटाई करने की लागत लगभग 1100 रुपए प्रति हेक्टेयर आती है. इसकी कार्य क्षमता लगभग 0.21 हेक्टेयर प्रति घंटा है।

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इन कृषि यंत्रों को खरीदने के लिए आप अपने क्षेत्र में स्थानीय कंपनियों से संपर्क कर सकते हैं, जो कि कृषि यंत्रों का निर्माण करती हैं। बतादें, कि यह कृषि यंत्र आपको बहुत ही कम कीमत में मिल जाएंगे।